भोपाल: भोपाल और विदिशा के बीच सफर करने वालों के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार इस 44.83 किलोमीटर लंबे रास्ते को 4 लेन में बदलेगी. इसके लिए 1757.55 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया.
मंत्रिपरिषद द्वारा लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि भोपाल को भविष्य में बड़े मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए आसपास के शहरों से बेहतर सड़क संपर्क जरूरी है. भोपाल-विदिशा मार्ग का चौड़ीकरण इसी योजना का हिस्सा है.
उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि सड़क बेहतर होने से भोपाल, विदिशा और इनके बीच आने वाले इलाकों में आने-जाने का समय कम होगा और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा.”
सांची और कर्क रेखा से होकर गुजरेगा 4 लेन रास्ता
शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह के द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार भोपाल-विदिशा राज्य मार्ग-28 अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-146 के सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाता है. यह भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर जैसे इलाकों को जोड़ता है.
इस सड़क की खासियत यह भी है कि रास्ते में सांची आता है. सांची का बौद्ध स्तूप देश ही नहीं, दुनिया के महत्वपूर्ण बौद्ध स्थलों में शामिल है और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है. इसी मार्ग पर कर्क रेखा भी पड़ती है.
यानी सड़क का चौड़ीकरण सिर्फ भोपाल और विदिशा के बीच आने-जाने को आसान नहीं करेगा, बल्कि सांची जैसे पर्यटन स्थल तक पहुंच को भी बेहतर बना सकता है.
विदिशा पहले से ही भोपाल के करीब होने के कारण राजधानी से सड़क और रेल दोनों माध्यमों से जुड़ा है. जिला प्रशासन की जानकारी के अनुसार भोपाल से विदिशा की दूरी करीब 60 किलोमीटर है. (Vidisha)
सड़क बनाने का खर्च कैसे उठाएगी सरकार?
परियोजना को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल यानी HAM के आधार पर बनाया जाएगा. आसान भाषा में समझें तो सड़क बनाने का पूरा पैसा सरकार एक साथ नहीं देगी.
परियोजना की निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम राज्य राजमार्ग निधि से निर्माण के दौरान देगा. बाकी 60 प्रतिशत राशि अगले 15 वर्षों में छह-छह महीने के अंतराल पर दी जाएगी.
इसके अलावा जमीन खरीदने और सड़क निर्माण से पहले होने वाले दूसरे कामों तथा निगरानी के लिए 364.41 करोड़ रुपये अलग से राज्य बजट से खर्च किए जाएंगे.
भोपाल बायपास पर 2031 तक टोल
मंत्रि-परिषद ने भोपाल बायपास पर भी बड़ा फैसला किया है. लगभग 52 किलोमीटर लंबे 4-लेन भोपाल बायपास पर 19 जुलाई, 2026 से 31 दिसंबर, 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क यानी टोल वसूलने की अनुमति दी गई है.
भोपाल बायपास का इस्तेमाल शहर के भीतर भारी ट्रैफिक को कम करने के लिए किया जाता है. यह सड़क भोपाल को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम की ओर जाने वाले रास्तों से जोड़ती है.
सरकार की योजना इस बायपास को 4 लेन से 6 लेन करने की है. टोल से मिलने वाली राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा होगी और इसका इस्तेमाल राज्य की सड़कों के विकास और रखरखाव में किया जाएगा.
सीहोर में सोयाबीन अनुसंधान के लिए 20 हेक्टेयर जमीन
किसानों से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला सीहोर जिले के इछावर तहसील में लिया गया है. मंत्रि-परिषद ने भाउखेड़ी गांव में 20 हेक्टेयर जमीन स्थायी पट्टे पर देने की मंजूरी दी है. यह जमीन राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान के लिए दी जाएगी.
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि ICAR का राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान पहले से इंदौर में काम कर रहा है. इसकी शुरुआत सोयाबीन पर शोध के लिए 1987 में राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र के रूप में हुई थी. बाद में यह भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान बना और जनवरी 2025 में इसका नाम बदलकर ICAR-National Soybean Research Institute किया गया. संस्थान सोयाबीन की नई किस्मों, उत्पादन बढ़ाने और किसानों के लिए बेहतर तकनीक विकसित करने पर काम करता है. (ICAR – National Soybean Research Institute)
सीहोर में जमीन उपलब्ध कराने के फैसले से मध्य प्रदेश में सोयाबीन से जुड़े शोध और गतिविधियों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है. यह फैसला ऐसे समय हुआ है जब सोयाबीन मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों में शामिल है.
महिलाओं के पुरस्कार की राशि दोगुनी
मंत्रि-परिषद ने महिलाओं से जुड़े दो राज्य स्तरीय पुरस्कारों की राशि भी बढ़ाई है.
समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाली महिलाओं को दिए जाने वाले रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार की राशि अब 2 लाख रुपये होगी.
इसी तरह रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि भी 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है.
सरकार का कहना है कि पुरस्कार राशि बढ़ाने का उद्देश्य समाज सेवा और वीरता के क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को प्रोत्साहित करना है.
फैसलों का बड़ा मतलब
मंगलवार की कैबिनेट बैठक के फैसलों में सड़क, खेती और महिला सशक्तिकरण तीनों पर जोर दिखाई देता है. लेकिन भोपाल-विदिशा सड़क परियोजना का असर सबसे व्यापक हो सकता है. राजधानी के आसपास तेजी से बढ़ते शहरी और औद्योगिक क्षेत्र को बेहतर सड़क नेटवर्क की जरूरत है.
भोपाल के मास्टर प्लान 2031 में भी सड़क नेटवर्क और भविष्य के विस्तार को लेकर अलग से योजना तैयार की गई है. (MPTownPlan)
ऐसे में भोपाल-विदिशा मार्ग का 4 लेन होना आने वाले वर्षों में राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों के विकास की तस्वीर बदलने वाली परियोजनाओं में शामिल हो सकता है. हालांकि इसका वास्तविक फायदा सड़क बनने के बाद निर्माण की गुणवत्ता, समय पर काम पूरा होने और आसपास के क्षेत्रों में होने वाले औद्योगिक व शहरी विकास पर निर्भर करेगा.

