भोपाल: परीक्षा पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर सख्ती की दिशा में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परीक्षा संबंधी अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बाद राज्य में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों के लिए चार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित कर दिए गए हैं.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को बताया कि भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में स्थापित इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा संबंधी अनियमितताओं तथा युवाओं की शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी. ऐसे मामलों का तीन महीने के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा.
प्रमुख बातें.
- भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में 4 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित.
- पेपर लीक और परीक्षा संबंधी मामलों का 3 महीने में निपटारा करने का लक्ष्य.
- नीट (NEET) सहित सभी परीक्षाओं के लिए स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार होगा.
- युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की चेतावनी.
- केंद्र सरकार पेपर लीक कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में.
मुख्यमंत्री ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश की जनता के हित में जब भी कोई निर्णय लिया जाता है, मध्य प्रदेश उसे लागू करने और उसके अनुरूप नीतिगत व्यवस्था तैयार करने वाला अग्रणी राज्य रहा है.”
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि युवाओं के सपनों को साकार करने में किसी प्रकार की बाधा न आए. पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में तेजी से होगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीट सहित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करने के लिए एक स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल तैयार किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा.
क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद परीक्षा पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं में धांधली, शिक्षा और रोजगार से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों की तुलना में तेज गति से होगी. सरकार का उद्देश्य ऐसे मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण होने वाली देरी को कम करना और युवाओं का भरोसा बहाल करना है.
गुरु पूर्णिमा पर ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रिपरिषद की बैठक से पहले कहा कि इस वर्ष पूरे प्रदेश में गुरु पूर्णिमा ‘महर्षि सांदीपनि श्रद्धा पर्व’ के रूप में मनाई जाएगी. इसे जनभागीदारी का उत्सव और सांस्कृतिक-शैक्षणिक जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा ताकि गुरु-शिष्य परम्परा का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके.
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश में जिन सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण अभी शेष है, उसे शीघ्र पूरा कराया जाए.
केंद्र भी कानून को और सख्त बनाने की तैयारी में.
देशभर में परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने मंगलवार (28 जुलाई, 2026) को लोकसभा में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश किया.
यदि यह विधेयक संसद से पारित हो जाता है, तो वर्ष 2024 के पेपर लीक विरोधी कानून में महत्वपूर्ण संशोधन लागू होंगे. प्रस्तावित संशोधनों के अनुसार परीक्षा से जुड़े कदाचार में शामिल व्यक्तियों के लिए तीन से पांच वर्ष की सजा बढ़ाकर पांच से दस वर्ष तक की जा सकेगी. व्यक्तिगत जुर्माना बढ़ाकर 50 लाख रुपये तक किया जाएगा, जबकि संगठित अपराध गिरोहों और परीक्षा सेवा प्रदाताओं पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा.
विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि आरोप पत्र दाखिल होने के 60 दिनों के भीतर पुलिस को जांच पूरी करनी होगी तथा तीन महीने के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का प्रयास किया जाएगा. उच्च न्यायालयों में दायर अपीलों के निस्तारण के लिए भी तीन महीने की समय सीमा प्रस्तावित की गई है.
यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
हाल के वर्षों में नीट, भर्ती परीक्षाओं और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं को प्रभावित किया है. ऐसे मामलों में त्वरित जांच और समयबद्ध सुनवाई की मांग लगातार उठ रही थी. मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय और केंद्र सरकार का प्रस्तावित संशोधन इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

